Wednesday, April 23, 2014
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मध्यप्रदेश
व्यापम घोटाले को लेकर युवा कांग्रेस का धरना प्रदर्शन
25 December 2013
* व्यापम घोटाला की सीबीआइ जाँच हो: कुणाल चौधरी
भोपाल, 25/दिसम्बर/2013 (ITNN)>>>>   व्यापन घोटाले को लेकर यूवा कांग्रेस ने 24.12.2013 को बोर्ड ऑफिस के सामने धरना प्रदर्शन किया । जिसमे कई यूवाओं के साथ भोपाल जिले के कांग्रेस अध्यक्ष और वरिष्ट नेता पीसी शर्मा भी मोजूद थे। यूवा कांग्रेस के अध्यक्ष  कुणाल चौधरी प्रदेश यूथ कांग्रेस अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष यूवा कांग्रेस अमित शर्मा और जिला कंग्रेस्ब अध्यक्ष पीसी शर्मा ने धरना देते हुए कहा की प्रदेश में हो रही युवाओं के साथ धोखाधड़ी की जिम्मेदार भाजपा सरकार के पूर्व मंत्री लक्ष्मी कान्त शर्मा पर एसटीफ ने चुनाव से पहले शिकंजा कास लिया था पर जैसे ही चुनाव के परिणाम सामने आये और भाजपा की सरकार बनी तो एसटीएफ का रवय्या मंत्रियो के प्रति नरम पद गया। 

जिससे ये डर बना हुआ है की निष्पक्षता के साथ जनता के सामने व्यापम घोटाले का सच लोगो तक नहीं आ सकेगा।साथ ही भाजपा की राष्ट्रिय उपाध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के उस बयान से सहमत हूँ कि “देश में बिहार के चारा घोटाले के बाद सबसे बड़ा कोई घोटाला सामने आया है तो वह मध्यप्रदेश का व्यापमं घोटाला है जिसकी व्यापकता पातालसे लेकर आकाश तक है” मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस इस घोटाले की अभी तक ईमानदारी और निष्पक्षता से जांच करने वाले एस.टी.एफ. के कर्तव्यनिष्ठा अधिकरियों और पुलिसकर्मियों को कोटि-कोटि धन्यवाद देती है तथा उनके उज्जवल भविष्य की कामना करती है निश्चित रूप से प्रदेश और देश के मीडिया जगत ने लोकतंत्र के एक सजग प्रहरी के रूप में देश व प्रदेश के सामने इस शर्मसार करने वाले घोटाले की व्यापकता को प्रस्तुत किया है जिसका युवा कांग्रेस सम्मान करती है।

व्यवसायिक परीक्षा मंडल द्वारा अपने स्थापना के वर्ष 1982 से निष्पक्ष और गोपनीय परीक्षा प्रणाली की स्थापना करके प्रदेश के जनमानस का विश्वास अर्जित किया गया था किन्तु मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा लाये गए मध्यप्रदेश व्यवसायिक परीक्षा मंडल अधिनियम 2007 के प्रभावशील होने के बाद व्यवसायिक परीक्षा मंडल ने भ्रष्टाचार के सभी आयामों को पार कर दिया है,  व्यवसायिक परीक्षा मंडल की परीक्षाओं के माफ्रत बेरोज़गारी और प्रतिभावान छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का ताना-बाना प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा उसी दिन रच दिया गया था जब शिवराज सिंह चौहान ने पहली बार दिनांक 29.11.2005 को प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी और उनके ही कार्यकाल में व्यापमं अधिनियम 2007 प्रस्तुत कर भ्रष्ट और बेईमान अधिकारीयों को व्यावसायिक परीक्षा मंडल में परीक्षाओ के सञ्चालन के लिए न्युक्त किया था प्रदेश के मुख्यमंत्री अपनी नैतिक जिम्मेदारी से विमुख हो सकते है जबतक की प्रदेश के जनमानस के सामने व्यापम और डीमेट जैसे घोटालो की सत्यता सामने नहीं आ जाती है प्रदेश के लाखो युवाओ के भविष्य के साथ खेलवाड़ करने वाले व्यापम के तत्कालीन पदाधिकारियों की म.प्र. युवा कांग्रेस घोर निंदा करती है निश्चित रूप से म.प्र. व्यावसायिक परीक्षा मंडल वर्ष २००७ प्रदेश के लाखो बेरोजगार युवाओं और प्रतिभावान छात्रो के लिए अक काला अधिनियम सभीत हुआ है उक्त अधिनियम के माफ्रत ही प्रदेश की बीजेपी सरकार ने व्यापम को प्रवेश परिक्षये आयोजित करने के साथ ही परिशो को करने का दायित्व भी प्रदान कर दिया है।

कुणाल चौधरी ने कहा की हमारी मांग है जिन युवाओं ने व्यापम की परीक्षाओ की वजह से आत्महत्या की है उन्हें 25 लाख का मुआबजा दिया जाये और 58 लाख विद्यार्थियों को परीक्षा फ़ीस वापस की जाये और साथ में एक-एक लाख रुपये क्षतिपूर्ति के लिए दी जाए। मध्यप्रदेश के लाखो विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाला “व्यापम घोटाला” ने प्रदेश के उन सभी जनता के मुलाज़िमो और सरकार के मुलाज़िमो का मुंह काला किया है, जो आम जनता से ये कहकर वोट मांगते है की हम आपके अधिकार के लिए लड़ेंगे और आपका इंसाफ आपको दिलाएंगे पर कभी-कभी सच बिलकुल इसके विपरीत होता है। इस बात की हम तारीफ करते है की यूवा कांग्रेस का यूथ इस घोटाले को लेकर सामने आया पर क्या उन विद्यार्थीवर्ग को सामने नहीं आना चाहिए जो इससे पीड़ित है, क्या उन बच्चो के भविष्य के साथ खिलवाड़ देखते हुए उनके परिवार को जनता के सामने नहीं आना चाहिए।

ये धरना प्रदर्शन हुआ पर इस धरना प्रदर्शन को समाज के कई वर्ग राजनैतिक परिदृश्य से देख रहे होंगे। इस घोटाले को सामने लाने के लिए उन सभी पीड़ितों को सामने आना चाहिए जो इससे पीड़ित हैं और जिनके करीबी इस घोटाले की वजह या तो उन्होंने आत्म हत्या कर ली या मानसिक रोग (डिप्रेशन) के शिकार हो गये। होता ये है की इन् मामलो पर लोग अपनी प्रतिक्रिया दे कर या ये कह कर की “कीड़े पड़ेंगें ऐसे लोगो को जिन्होंने ये पाप किया है” अपना कर्तव्य पूरा कर देते है पर इनके लिए खड़ा होने वाला अन्ना या केजरीवाल सामने नहीं आता। ये इन पीड़ितों का दुर्भाग्य कहैं या हमारे देश के यूवाओं की नींद का असर जो इनकी आँखे खुलने ही नहीं दे रहा।