Saturday, 17 November, 2018
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दिल्ली - 07 August, 2018

राज्यसभा उपसभापति चुनाव पर NDA में रार, गणित बिगाड़ सकती है अकाली दल की नाराजगी

राज्यसभा में उपसभापति के उम्मीदवार को लेकर एनडीए में घमासान शुरू हो गया है. राज्यसभा में उपसभापति के लिए एनडीए की तरफ से उम्मीदवार जेडीयू सांसद हरिवंश को बनाये जाने से एनडीए की दो सबसे पुरानी सहयोगी पार्टियां अकाली दल और शिवसेना नाराज हैं.

नई दिल्ली,7/अगस्त/2018/ITNN>>> राज्यसभा में उपसभापति के उम्मीदवार को लेकर एनडीए में घमासान शुरू हो गया है. राज्यसभा में उपसभापति के लिए एनडीए की तरफ से उम्मीदवार जेडीयू सांसद हरिवंश को बनाये जाने से एनडीए की दो सबसे पुरानी सहयोगी पार्टियां अकाली दल और शिवसेना नाराज हैं.


दरअसल अकाली दल को उम्मीद थी राज्यसभा में एनडीए का उपसभापति का उम्मीदवार उनका होगा. बता दें कि अकाली दल से नरेश गुजराल का नाम चर्चा में था लेकिन अंतिम समय पर बीजेपी ने जेडीयू के सांसद हरिवंश को उम्मीदवार बना दिया जिससे अकाली दल में नाराजगी हैं. जिसे लेकर पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबिर सिंह बादल की अध्यक्षता में अकाली दल के संसदीय दल की बैठक केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के घर पर हुई.


सूत्रों की मानें तो अकाली दल 9 अगस्त को राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव में गैरहाजिर भी रह सकती है. सुखबीर बादल ने बुधवार को एक बार फिर अपनी पार्टी के संसदीय दल की बैठक बुलाई है. इस बीच सूत्रों के हवाले से खबर है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अकाली दल के प्रमुख प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर सिंह बादल से भी बात की है. लेकिन अमित शाह के फोन पर बात करने बाद भी सूत्रों का कहना हैं कि बुधवार 10 बजे पार्टी की संसदीय दल की बैठक में कोई बड़ा फैसला हो सकता है.


राज्यसभा में एनडीए के उपसभापति के पद के लिए जेडीयू के सांसद हरिवंश को उम्मीदवार बनाये जाने से एनडीए के सहयोगी अकाली दल और शिवसेना इसलिए भी नाराज हैं कि उम्मीदवार की घोषणा किए जाने से पहले शिवसेना प्रमुख उद्भव ठाकरे से ना किसी अन्य नेता से और ना अकाली दल के नेतृत्व से उम्मीदवार को लेकर चर्चा की गई.


सूत्रों की मानें तो शिवसेना इस बात से भी नाराज़ है कि पहले जब अकाली दल के सांसद नरेश गुजराल का नाम एनडीए के उम्मीदवार के तौर पर लगभग तय था तो अंतिम समय में जेडीयू सांसद हरिवंश के नाम की घोषणा वो भी बिना चर्चा के क्यों की गई. शिवसेना वैसे भी 2019 का चुनाव वो बीजेपी के साथ न लड़ने की घोषणा कर चुकी है.


सूत्रों की मानें तो अकाली दल और शिवसेना की नाराज़गी के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने एनडीए के सभी सहयोगी दलों के प्रमुख नेताओं से राज्यसभा के उपसभापति के उम्मीदवार जेडीयू सांसद हरिवंश के नाम पर आम सहमति बनाने के लिए बनाने के लिए फोन पर चर्चा  कर रहे हैं.


बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने फोन पर रामविलास पासवान और चिराग पासवान से राज्यसभा में उपसभापति उम्मीदवार के लिए जेडीयू सांसद हरिवंश के नाम को लेकर चर्चा की. रामविलास पासवान और चिराग पासवान ने राज्यसभा के उपसभापति के उम्मीदवार के जेडीयू सांसद हरिवंश के नाम का स्वागत किया है. गौरतलब है कि रामविलास पसवान की पार्टी का एक भी सांसद राज्यसभा में नहीं है. फिर भी अमित शाह लोजपा नेता से बात कर इस मुद्दे पर एनडीए को एकजुट रखने का प्रयास कर रहे हैं.


PAC सदस्य का चुनाव हार गए हरिवंश


एनडीए में राज्यसभा के उपसभापति के उम्मीदवार को लेकर मची कलह के बीच एक दिलचस्प वाकया हुआ कि संसद की पब्लिक अकाउंट कमेटी (PAC) के राज्यसभा से दो सदस्यों का चुनाव होना था जिसमें बीजेपी के भूपेंद्र यादव और जेडीयू से हरिवंश दोनों के ही PAC में आराम से चुन लिए जाने उम्मीद थी.


क्योंकि कांग्रेस ने पहले घोषणा की थी वो इस चुनाव से दूर रहेगी. लेकिन अंतिम समय में कांग्रेस ने टीडीपी सांसद सीएम रमेश का समर्थन किया. PAC के लिए दो सदस्यों के चुनाव में पूरे विपक्ष के उम्मीदवार टीडीपी सांसद सीएम रमेश को सबसे ज़्यादा 106 वोट मिले, बीजेपी सांसद और महासचिव भूपेंद्र यादव को 69 वोट मिले और साथ ही जेडीयू सांसद हरिवंश को केवल 26 वोट मिले. जिससे 9 अगस्त को होने वाले राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव से पहले ही उन्हें एक बड़ी हार का सामना सदन में करना पड़ा. अब सवाल यह है कि जो बीजेपी हरिवंश को PAC के सदस्य का चुनाव नहीं जिता सकी वो उन्हें राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव कैसे जिता पाएगी.  


राज्य सभा का अंक गणित देखे तो अकाली दल और शिवसेना की नाराज़गी के बाद अगर बीजेडी, टीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस भी अनुपस्थित रहें तो एनडीए के उम्मीदवार हरिवंश को हार का सामना करना पड़ सकता है.


उपसभापति के लिए क्या कहता है राज्यसभा का अंकगणित ?


संख्याबल के हिसाब से देखा जाए तो राज्यसभा में कुल सदस्यों की संख्या 244 है. मतलब एनडीए को बहुमत के लिए 123 सदस्यों का समर्थन चाहिए.  बीजेपी के 73, जेडीयू के 6, अकाली दल के 3, शिवसेना के 3 , बोडो पीपुल फ़्रंट के 1 , नागा पीपुल फ़्रंट के 1 , सिक्किम डेमक्राटिक फ़्रंट के 1, आरपीआई के 1, 3 निर्दलीय और 3 मनोनीत सदस्यों को मिलाकर कर एनडीए के पास 95 सांसद हैं. ऐसे में एनडीए को चुनाव जीतने के लिए अन्य 28 सांसदों की जरूरत है.


सूत्रों के अनुसार एआईएडीएमके के 13, टीआरएस के 6 और वाईएसआर कांग्रेस के 2 सदस्य एनडीए के उम्मीदवार हरिवंश को अपना समर्थन देने के लिए सहमति दे चुके हैं. फिलहाल एनडीए के उम्मीदवार हरिवंश को ताज़ा संख्याबल के अनुसार 116 सांसदों का समर्थन प्राप्त है.


बीजेडी के समर्थन पर सस्पेंस!


बीजेडी  ने अभी अपना रुख साफ नहीं किया है और उसके पास 9 सांसद है. अगर बीजेडी एनडीए को समर्थन नहीं करती है तो एनडीए उम्मीदवार को मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है.  


ऐसे में यदि अकाली दल और शिवसेना को मनाने में पीएम मोदी और अमित शाह कामयाब नहीं हो पाते हैं. और शिवसेना व अकाली दल चुनाव के वक़्त गैरहाजिर रहते हैं तो एनडीए की संख्या 110 रह जायेगी. यदि इसमें बीजेडी के 9 सांसदों को भी जोड़ दिया जाये तो भी एनडीए को बहुमत का आंकड़ा पूरा करने के लिए 4 अन्य सांसदो की जरूरत पड़ेगी. 4 सांसदों को अपनी तरफ लाना भले पीएम मोदी और अमित शाह के लिए असंभव ना हो लेकिन मुश्किल जरूर होगा.  


टीडीपी के एनडीए से बाहर जाने के बाद शिवसेना ने घोषण की है कि वो 2019 में महाराष्ट्र में बीजेपी के साथ चुनाव नहीं लड़ेगी. इसके बाद नीतीश कुमार की जेडीयू और रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी भी बीजेपी पर बिहार में सीटों को लेकर दबाव बनाए हुए है. बिहार में उपेन्द्र कुशवाह की राष्ट्रीय समता पार्टी ने कई मौक़ों पर बीजेपी नेतृत्व को इशारों इशारों में समझाया है कि वो नीतीश कुमार के साथ गठबंधन में नहीं रह सकते हैं. अब तो अकाली दल ने भी मोर्चा खोल दिया है. लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव में टीआरएस और एआईएडीएमके जैसे दलों ने समर्थन कर यह बता दिया है कि भविष्य में पीएम मोदी के नेतृत्व में एनडीए शामिल होने से उन्हें कोई गुरेज नहीं होगा.

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