प्रदेश विशेष
सृजन घोटाला- सुशील मोदी की बहन रेखा,भतीजी ऊर्वशी को दिए गए करोड़ों रुपए,नीतीश भी शामिल: तेजस्वी यादव
पटना,28/जून/2018/ITNN>>> बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने राज्य के वर्तमान डिप्टी सीएम सुशील मोदी पर घोटाले के गंभीर आरोप लगाए हैं. तेजस्वी ने सृजन घोटाले से जुड़े कई ट्वीट्स किए हैं जिसके पहले ट्वीट में उन्होंने कहा है.

कि डिप्टी सीएम मोदी की बहन रेखा और भतीजी ऊर्वशी को इस घोटाले के तहत सीधा फायदा पहुंचाया गया. राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) अध्यक्ष लालू यादव के सजायाफ्ता होने और खराब हेल्थ से जूझने के दौरान पार्टी की कमान संभाल रहे तेजस्वी ने आगे कहा कि इस घोटाले में मोदी की बहन और भांजी को करोड़ों का सीधा भुगतान किया गया.

नीतीश-सुशील का नाम क्यों नहीं ले रही CBI
उन्होंने इस ट्वीट में कुछ दस्तावेज भी अटैच किए हैं जिनके सहारे वो आरोप लगा रहे हैं कि इस घोटाले में सूबे के सीएम नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सुशील मोदी सीधे तौर पर शामिल हैं लेकिन सीबीआई उनका नाम नहीं ले रही. तेजस्वी ने सवाल खड़ा किया है कि आखिर ऐसा क्यों है?

सब नीतीश की छत्रछाया में हुआ
नीतीश और मोदी पर हमला करते हुए तेजस्वी कहते हैं कि मोदी के वित्त मंत्री रहते हुए राज्य को 2500 करोड़ रुपए का चूना लगाया गया और ये सब नीतीश कुमार की छत्रछाया में हुआ. उन्होंने ये भी सवाल किया है कि सीएम और वित्त मंत्री ने आरबीआई और तब के केंद्रीय वित्त मंत्री की शिकायतों पर एक्शन क्यूं नहीं लिया.

तेजस्वी ने लिखा है कि वो इस बात के सबूत दे रहे हैं कि घोटाला नीतीश कुमार को बताकर किया गया था और उन्होंने इस घोटाले को लेकर अपनी आंखें बंद कर ली. वहीं, उन्होंने नीतीश की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के लोगों के भी इसमें सीधे शामिल होने के आरोप लगाए.

क्या है सृजन घोटाला?
दरअसल, बिहार के भागलपुर जिले में एक सृजन नाम का एनजीओ है जिसे साल 1996 में महिलाओं को काम देने के मकसद से शुरू किया गया था. तीन अगस्त को 10 करोड़ के एक सरकारी चेक के बाउंस होने के बाद इस एनजीओ में घोटाला होने का मामला सामने आया. छानबीन में पता चला चला कि जिलाधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर से बैंक से सरकारी पैसा निकाल कर एनजीओ के खाते में डाला गया.

मामला सामने आते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गई. आनन-फ़ानन में पुलिस हरकत में आई. पुलिस ने एसआईटी का गठन करके इस मामले से जुड़े लोगों के घर और सृजन एनजीओ के ठिकानों पर छापेमारी करनी शुरू कर दी. साल 2017 में सामने आया ये घोटाला अब तक पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है.