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बुराड़ी कांड में नया खुलासा,घर से मिले कई रजिस्टर 2007 से लिखे जा रहे थे
नई दिल्ली,05/जुलाई/2018/ITNN>>> दिल्ली के बुराड़ी इलाके में 11 लोगों के शव मिलने की गुत्थी को सुलझाने के लिए दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम दिन रात लगी हुई है. क्राइम ब्रांच की टीम ने एक बार फिर उस घर की तलाशी की है. तलाशी में पुलिस को मृतक ललित की दुकान के कुछ रजिस्टर और बच्चों की किताबे बरामद की हैं. सूत्रों के मुताबिक इन रजिस्टर में बेहद चौंकाने वाली बातें लिखी हैं. पुलिस के लिए भी इन रजिस्टर में लिखी बातों को समझ पाना किसी चुनौती के कम नहीं है. पुलिस के मुताबिक देखने में जो रजिस्टर बरामद हुए हैं.

वो देखने में बेहद ही साधारण हैं लेकिन जैसे इनके पन्ने पलटे जा रहे हैं नए नए खुलासे सामने आ रहे हैं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक ये रजिस्टर 2007 से लिखे जा रहे थे. सूत्रों की माने तो तकरीबन 200 पेज लिखे गए हैं,इन रजिस्टर में तारीख डालकर लिखा गया है. सूत्रों के मुताबिक एक रजिस्टर में 27 मई 2013 की तारीख में लिखा है,ध्यान रखो,अपनी गलती सुनकर मन छोटा नहीं करो,जो गलती हुई है,उसे स्वीकार कर आगे बढ़ो,वर्तमान की बात करो,भविष्य अपने आप ही अच्छा बनेगा. आर्थिक व मानसिक परेशानी का सामना एक जुट होकर ही किया जा सकता है. 

प्राप्ति इस पर निर्भर करती है कि तुम उसे किस तरह संभालने के लायक हो,तुम्हारी उपलब्धियां तुम्हारे साथ हैं,वे तुमसे दूर नहीं हो सकतीं,गलतियों को सुनिश्चित होकर स्वीकार करो,बीता हुआ समय बीत गया है। सूत्रों के मुताबिक 28 मई 2013 की तारीख में लिखा है,तपस्या करनी है,आपसी तालमेल बनाकर रखकर तपस्या करनी है. वही सबसे महत्वपूर्ण है भक्ति का समय नहीं मिल पाता है तो आपसी तालमेल ही तपस्या है. समय जितना मिले उतनी भक्ति करो वरना आपसी तालमेल भी भक्ति है. इसी प्रकार रजिस्टर में कई ऐसी बातें लिखी हैं जिनका अर्थ निकाल पाना बेहद मुश्किल है. 

सूत्रों की मानें तो 2007 में ललित के पिता भोपाल दास की मौत हुई थी तभी से ललित के सपने में अक्सर पिता आते थे. यह बातें वह परिवार को बताता था. सपने में कही गई पिता की बातों को ललित ने रजिस्टर में लिखना शुरू कर दिया था. सूत्रों के मुताबिक पिछले तीन दिन में पुलिस को अब तक 20 से अधिक रजिस्टर और डायरी बरामद हो चुकी हैं. सूत्र बताते हैं कि ऐसा लगता है कि ललित को ऐसा अहसास होने लगा था कि वह अपने मृत पिता की रूह के संपर्क में है. हालांकि अभी भी क्राइम ब्रांच इस मामले में हर एंगल से जांच में जुटी हुई है. जांच में पुलिस मनोचिकित्सक का सहारा भी ले रही है.

मरना नहीं चाहता था भाटिया परिवार,अनुष्ठान के लिए बांधी मुंह-आंख पर पट्टी- सूत्र
पुलिस सूत्रों की माने तो शायद भाटिया परिवार को इस बात का अंदाजा था कि वो बच जाएंगे. दरअसल मृतक ललित के मुताबिक उसके पिता सपने में आते थे और उसे बताते थे कि क्या करना है,पैसा कहां लगाना? सूत्रों के मुताबिक रजिस्टर में लिखा है,पिताजी ने कहा है कि आखिरी समय पर झटका लगेगा,आसमान हिलेगा,धरती हिलेगी लेकिन तुम घबराना मत,मंत्र जाप तेज कर देना मैं तुम्हे बचा लूंगा. जब पानी का रंग बदलेगा तब नीचे उतर जाना, एक दूसरे की नीचे उतरने में मदद करना,तुम मरोगे नहीं बल्कि कुछ बड़ा हासिल करोगे. पुलिस सूत्रों के मुताबिक घर में हवन हुआ था एक बोतल में पानी भी रखा था. सूत्रों का यह भी कहना है कि ललित और उसकी पत्नी टीना के हाथ नहीं बंधे हुए थे.