प्रदेश विशेष
गुजरात हाई कोर्ट ने तीन दोषियों को 10 साल जेल की सजा सुनाई
नई दिल्ली,25/जून/2018/ITNN>>> गुजरात हाई कोर्ट ने गुजरात में 2002 के नरोदा पाटिया जनसंहार मामले में तीन दोषियों को 10-10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. जस्टिस हर्ष देवानी और जस्टिस ए एस सुपेहिया की बेंच ने तीन दोषियों - पी जी राजपूत,राजकुमार चौमल और उमेश भड़वाड को 10 साल के कठोर सश्रम कारावास की सजा सुनाई. अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि दोषियों को अपराध की बर्बरता के मुताबिक ही सजा देनी चाहिए. इस मामले में 16 आरोपियों में से तीन को 20 अप्रैल को सुनाए गए फैसले में दोषी करार दिया गया था. 

अदालत ने आज तीनों दोषियों को सजा सुनाते हुए उन्हें छह हफ्ते के भीतर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया. इसी अदालत द्वारा 20 अप्रैल को उन्हें दोषी ठहराये जाने पर तीनों दोषियों ने उनकी सजा की अवधि के सवाल पर आगे सुनवाई करने का अनुरोध करते हुये कहा था कि उनका सही तरीके से प्रतिनिधित्व नहीं हुआ था. आज अदालत ने सजा की अवधि के बारे में अपने फैसले में कहा कि इन लोगों द्वारा किया गया अपराध समाज के खिलाफ था और सजा भी दोषियों के अपराध की बर्बरता के अनुसार ही होनी चाहिए.

क्या था मामला
गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगने के एक दिन बाद गुजरात में भड़के दंगों में अहमदाबाद के नरोदा पाटिया क्षेत्र में 28 फरवरी 2002 को एक भीड़ ने 97 लोगों की हत्या कर दी. इस घटना में मारे गये ज्यादातर लोग मुस्लिम समुदाय के थे. 2002 में हुए नरोदा पाटिया हत्याकांड मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने इस हत्याकांड के आरोपी बाबू बजरंगी को 20 अप्रैल को मौत तक जेल की सजा सुनाई थी. 

बाबू बजरंगी को इस मामले में विशेष अदालत ने साल 2012 में मौत तक कैद की सजा सुनाई थी जिसे हाईकोर्ट ने बरकरार रखा था. वहीं,इसी मामले में हाईकोर्ट ने माया कोडनानी को निर्दोष करार दिया था. माया कोडनानी दंगो के समय नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री थीं और उन पर लोगों को भड़काने का आरोप था. माया कोडनानी को विशेष अदालत ने 28 साल की सजा सुनाई थी. लेकिन 20 अप्रैल को गुजरात हाईकोर्ट ने उन्हें निर्दोष करार दिया था.