प्रदेश विशेष
सिद्धारमैया हो या येदियुरप्पा,सबने ली है देवगौड़ा से क्लास
नई दिल्‍ली,15/मई/2018 (ITNN) >>> कर्नाटक विधानसभा चुनाव में वोटों की गिनती जारी है. शुरुआती रुझान अपेक्षा के अनुरूप ही आए हैं. खबर अपडेट किए जाने ते बीजेपी और कांग्रेस में जोरदार टक्कर देखने को मिल रही है,लेकिन रुझानों में दोनों में से कोई भी दल बहुमत के आंकड़े को पार करती नहीं दिख रही है. रुझानों में जेडीएस तीसरे नंबर पर दिख रही है. हालात दिख रहे हैं कि बीजेपी हो चाहे कांग्रेस,दोनों में से किसी को भी सरकार बनाने के लिए जेडीएस की जरूरत पड़ेगी, यानी यह पार्टी किंगमेकर की भूमिका में होगी. 

खबर लिखे जाने तक रुझानों में बीजेपी 93,कांग्रेस 91 और जेडीएस 26 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. इस पूरे राजनीतिक परिदृश्य में एक बात दिलचस्प यह है मुख्यमंत्री सिद्धारमैया हों या बीजेपी के सीएम प्रत्याशी बीएस येदियुरप्पा दोनों ने जेडीएस के वरिष्ठ नेता एचडी देवेगौड़ा की निगरानी मे राजनीति सीखी है. इस बार देवेगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी का किंगमेकर की भूमिका निभाने की पूरी संभावना है. ये दोनों पिता-पुत्र किंगमेकर और किंग दोनों की भूमिकाओं को निभाने में माहिर हैं. 

अब देवगौड़ को ही ले लीजिए,किसने सोचा था कि इतनी छोटी सी पार्टी का नेता प्रधानमंत्री के पद पर आसीन हो सकता है,लेकिन उन्‍होंने यह कर दिखाया.
सिर्फ पीएम बनना नहीं, देवगौड़ा की एकमात्र उपलब्धि दूसरी ओर जेडी-एस के शीर्ष नेता और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा और उनके बेटे एचडी कुमार स्‍वामी का ट्रैक रिकॉर्ड भी कांग्रेस-बीजेपी के लिए कम चिंता की बात नहीं है. ये दोनों पिता-पुत्र किंगमेकर और किंग दोनों की भूमिकाओं को निभाने में माहिर हैं. अब देवगौड़ को ही ले लीजिए,किसने सोचा था कि इतनी छोटी सी पार्टी का नेता प्रधानमंत्री के पद पर आसीन हो सकता है,लेकिन उन्‍होंने यह कर दिखाया.

चुनाव प्रचार के दौरान एचडी देवगौड़ा ने कहा था वे किसी भी सूरत में बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे. उन्होंने यहां तक कहा था अगर उनके बेटे एचडी कुमार स्वामी बीजेपी के साथ जाएंगे तो वे उनसे नाता तोड़ लेंगे. हालांकि वोटिंग संपन्न होने के बाद देवेगौड़ा और एचडी कुमार स्वामी के सुर एक जैसे दिखे थे. दोनों पिता-पुत्र ने कहा था कि वे चुनाव रिजल्ट आने के बाद किसी भी दल के साथ गठबंन पर विचार करेंगे.

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एचडी देवेगौड़ा और उनके बेटे कुमारस्वामी कांग्रेस और बीजेपी को भी नाकों चने चबवा चुके हैं. देवगौड़ा जेडीएस की कहानी सिर्फ कांग्रेस पर दबाव बनाने तक सीमित नहीं है. ये राजनीतिक किस्‍सा अभी और रोचक मोड़ लिए हुए है. कांग्रेस के साथ सरकार बनाते वक्‍त जेडीएस ने तर्क दिया था कि वह सांप्रदायिक ताकतों को सत्‍ता से बाहर रखना चाहती है,लेकिन दो साल सरकार चलाने के बाद जेडी-एस ने पलटी मारी. नतीजा- देवगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्‍वामी कर्नाटक के सीएम बन गए. 

जेडीस ने बीजेपी के साथ सीएम रोटेशन का फार्मूला बनाया,जिसके तहत कुमारस्‍वामी 2007 तक कर्नाटक के सीएम रहे. इसके बाद बीजेपी के बीएस येदुरप्‍पा के मुख्‍यमंत्री बनने की बारी आई तो जेडी-एस ने उन्‍हें रास्‍ता देने से साफ इनकार कर दिया था. देवगौड़ा ने बेटे के लिए ले ली थी सिद्धारमैया की बलि 2004 का ही एक और किस्‍सा है. सिद्धारमैया जो कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के सीएम हैं,कभी जेडी-एस में देवगौड़ा की पार्टी के सदस्‍य हुआ करते थे. इतना ही नहीं,धरम सिंह की सरकार में सिद्धारमैया डिप्‍टी सीएम के पद पर तैनात थे. 

उस वक्‍त कर्नाटक में जेडी-एस और कांग्रेस की मिलीजुली सरकार थी. लेकिन एक वर्ष बाद ही देवगौड़ा ने सिद्धारमैया को अनुशासनहीनता के आरोप लगाते हुए हटा दिया था. दरअसल, उन्‍हें डर था कि सिद्धारमैया कुमारस्‍वामी के लिए चुनौती बन सकते हैं. हालांकि,बाद में सिद्धारमैया ने कांग्रेस ज्‍वॉइन कर ली और सीएम बनने का उनका सपना पूरा हो गया.