42 million game running in the Department of Yogi
प्रदेश विशेष
CM योगी के विभाग में चल रहा 42 करोड़ का खेल
आगरा,24/जुलाई/2018/ITNN>>> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजनीतिक मंच से लाख बार कहें कि न खाऊंगा न खाने दूंगा लेकिन उत्तर प्रदेश में उनकी अपनी सरकार में करोड़ों के वारे न्यारे हो रहे हैं और ईमानदारी का भगवा चोला पहने हुए यूपी सरकार भी इस पर चुप्पी साधे हुए है। ताजा मामला ताजनगरी आगरा में आगरा विकास प्राधिकरण से जुड़ा हुआ है,जहां योगी के अपने विभाग में अफसरों ने ब्याज माफी के 42 करोड़ के खेल को अमलीजामा पहनाने का काम किया है जिसे अब अंतिम रूप दिया जाना बाकी है.
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मामला ओपी चैन हाऊसिंग की नीलामी द्वारा आबंटित ताजनगरी आगरा की द्वितीय चरण योजना से संबंधित भूखंड संख्या जीएच-3 का है जिसमें आगरा विकास प्राधिकरण बोर्ड ने प्रधानमंत्री आवास बनाने के नाम पर लगभग 42 करोड़ का ब्याज माफ कर दिया है। यही वजह है कि बोर्ड के फैसले पर सवालिया निशान लग रहे हैं कि आखिर आगरा विकास प्राधिकरण के अफसर इतनी बड़ी रकम कैसे ब्याज माफी के रूप में माफ कर सकते हैं।

प्राधिकरण बोर्ड ने इस फैसले को इन हालातों में अंजाम दिया है जब एक गरीब आवेदनकर्ता ब्याज के अभाव में अपना मकान छोड़ देता है व उसका आबंटन निरस्त हो जाता है और वह उसके बाद खुले आसमान के नीचे जीवन गुजारने को मजबूर हो जाता है। इस दौरान नौकरशाही उसकी मुफलिसी की लाख दलीलों के बाबजूद उसकी बात को अनसुना कर देती है। ऐसे में 42 करोड़ की ब्याजमाफी की बात मुनासिब नहीं लगती और भगवा चोले में रंगी ईमानदार योगी सरकार की कथनी और करनी के अंतर को स्वाभाविक तौर पर प्रकट करती है।

जनहित याचिका दायर करने की हो रही तैयारी
ओपी चैन हाऊसिंग का यह मामला बहुचर्चित है। यही वजह है कि पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार में इस प्रकरण को सुलझाने के लिए ओपी चैन हाऊसिंग ने स्थानीय स्तर से लेकर शासन स्तर तक पैरवी की थी क्योंकि ओपी चैन हाऊसिंग ने सिकंदरा स्थित इसी तरह के एक विवादित प्रोजैक्ट को सरकार के माध्यम से सुलझाया था। यही वजह है कि लगे हाथ ओपी चैन हाऊसिंग ने इस प्रकरण को भी सुलझाने की कवायद की लेकिन वह अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाया और आखिरकार यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया क्योंकि आगरा विकास प्राधिकरण से जुड़े तत्कालीन अफसरों ने इस पर अपना नकारात्मक मंतव्य प्रकट किया था जोकि आज भी दस्तावेजों में मौजूद है। इस संबंध में प्राधिकरण बोर्ड के एक पूर्व सदस्य का कहना है कि जल्द ही इस मसले पर एक जनहित याचिका दायर की जाएगी जिसमें अफसरों का फंसना तय है क्योंकि इस कार्य को नियम और कानून की धज्जियां उड़ाते हुए अंजाम दिया जा रहा है।