Gorakhpur and Fulpur s by election for CM Yogi not less than fire test
प्रदेश विशेष
गोरखपुर और फूलपुर के उपचुनाव CM योगी के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं
लखनऊ,09/फरवरी/2018(ITNN)>>> उत्तर प्रदेश में लोकसभा की गोरखपुर और फूलपुर सीट के उपचुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अग्निपरीक्षा से कम नहीं होंगे। राजस्थान में लोकसभा की 2 और विधानसभा की 1 सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा को मिली करारी हार के बाद भाजपा उत्तर प्रदेश की इन 2 सीटों पर हो रहे उपचुनाव को हर हाल में जीतना चाहेगी। राजस्थान के बाद इन दोनों सीटों के उपचुनाव में भाजपा हारी तो 2019 के आम चुनाव में गलत संदेश जा सकता है।

योगी सरकार बनने के बाद राज्य में हुए नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा का दावा है कि उसने अच्छा प्रदर्शन किया। 16 नगर निगमों में से 14 पर भाजपा उम्मीदवार जीते। विधानसभा की सिकन्दरा सीट पर भी उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार जीता। ये चुनाव राजस्थान में हुए उपचुनाव के पहले हुए थे। राजस्थान में हुए उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद भाजपा को गोरखपुर और फूलपुर सीट बरकरार रखना जरुरी हो गया है। इन उपचुनाव को राजनीतिक प्रेक्षक योगी की अग्निपरीक्षा के रुप में देख रहे हैं।

वर्ष 2014 में योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से और केशव प्रसाद मौर्य फूलपुर सीट से चुनाव जीते थे। योगी के मुख्यमंत्री और मौर्य के उपमुख्यमंत्री बनने के बाद दोनों को राज्य विधान परिषद का सदस्य बना दिया गया। इसके बाद दोनों ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। चुनाव आयोग ने अब दोनों सीटों पर 11 मार्च को मतदान कराने का निर्णय लिया है। गोरखपुर में चर्चा का विषय है कि उपचुनाव में क्या भाजपा उम्मीदवार गोरखनाथ मंदिर से ही होगा,क्योंकि लोकसभा के एक उपचुनाव समेत 10 चुनाव में गोरखपुर का सांसद गोरक्षपीठ से ही चुना जाता रहा है। सन् 1970 में पहली बार गोरक्षपीठाधीश्वर और योगी आदित्यनाथ के गुरु महन्त अवैद्यनाथ निर्दलीय उम्मीदवार के रुप में गोरखपुर के सांसद चुने गए थे।

महन्त अवैद्यनाथ 1989 में हिन्दू महासभा से और 1991 तथा 1996 में भाजपा प्रत्याशी के रुप में चुनाव जीतकर लोकसभा में गोरखपुर का प्रतिनिधित्व किया। वह 1969 में भी सांसद चुने गए थे। इससे पहले उनके गुरु महंत दिग्विजय नाथ ने भी एक बार लोकसभा में गोरखपुर का प्रतिनिधित्व किया था।  वर्ष 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 में योगी आदित्यनाथ गोरखपुर लोकसभा सीट पर लगातार कामयाब होते रहे। गत 19 मार्च को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद ही तय हो गया था कि योगी लोकसभा सीट से इस्तीफा देंगे। तमाम राजनीतिक कयासों के बीच,अब लाख टके का सवाल है कि गोरखपुर संसदीय क्षेत्र से अगला सांसद कौन होगा।