Yogi government will give clean chit to Sadhvi Prachi in case of inflammatory speech
प्रदेश विशेष
भड़काऊ भाषण मामले में क्या साध्वी प्राची को योगी सरकार देगी क्लीन चिट
लखनऊ,30/अप्रैल/2018/ITNN>>>  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बीजेपी के दो सांसद और तीन विधायकों के खिलाफ मुजफ्फरनगर साम्प्रदायिक दंगों में भड़काऊ भाषण और आपराधिक आरोपों में दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया में जुटी है. इनमें बिजनौर के सांसद कुंवर भारतेंद्र सिंह और मुजफ्फरनगर के सांसद संजीव बालियान के साथ बीजेपी के तीन विधायक संगीत सोम, सुरेश राणा, उमेश मलिक और साध्वी प्राची भी शामिल हैं. 

इस लिस्ट में फायरब्रांड हिंदूवादी नेता साध्वी प्राची का नाम भी शामिल है. खास बातचीत में साध्वी प्राची ने दावे के साथ कहा कि सपा सरकार ने हम लोगों पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए थे. उन्होंने कहा कि हमें पूरा भरोसा हैं कि योगी सरकार हम लोगों पर दर्ज केस वापस लेगी.

संगठन में रखा अपना पक्ष
फायरब्रांड हिन्दूवादी नेता ने खुलासा करते हुए बताया कि इस मामले में हमने अपनी बात संगठन (विश्व हिन्दू परिषद्) में भी रखा था. जहां मुझे पूरा भरोसा दिया गया था कि राजनैतिक देवेश में दर्ज किए गए फर्जी मुकदमे जल्द वापस लिए जाएंगे. साध्वी प्राची ने कहा उस दिन बीजेपी सांसद संजीव बालियान और विधायक संगीत सोम मुजफ्फरनगर नहीं पहुंच पाए थे. उन्हें पुलिस ने मुजफ्फरनगर की सीमा पर ही रोक लिया था. मौके पर मेरे साथ उमेश मलिक मौजूद थे. मामला कोर्ट में चल रहा है,मैं हर तारीख पर कोर्ट पहुंचती हूं.

पासपोर्ट नहीं हुआ 'रिन्यू'
साध्वी प्राची ने कहा कि मुजफ्फरनगर दंगे के मामले में मेरा पासपोर्ट अबतक 'रिन्यू' नहीं हुआ. मुझे धार्मिक प्रचार के लिए विदेश जाना था. लेकिन मैने इसकी सिफारिश नहीं की. क्योकि मुझे पता है कि मै निर्दोष हूं. बकौल साध्वी, कहती है कि सपा सरकार में मेरे खिलाफ मुजफ्फरनगर, बागपत, बड़ौत, आजमगढ़, दादरी, रामपुर, बरेली, सहारनपुर और वाराणसी जिलों में फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए.

7 सिंतबर 2013 को भड़की थी हिंसा
महापंचायत के बाद इस मामले में दो केस सिकेरा पुलिस स्टेशन में दर्ज किए गए थे. इसमें शाहनवाज की हत्या के मामले में आरोपी सचिन और गौरव की हत्या के बाद 7 सिंतबर 2013 को जिलें में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे. आरोप है कि आरोपियों ने अगस्त 2013 में एक महापंचायत का आयोजन कर अपने भाषणों से लोगों को हिंसा के लिए भड़काया था. इसके बाद मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाके में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे. इन दंगों में 60 लोग मारे गए थे और 40 हजार से ज्यादा लोग बेघर हुए थे.

न्याय विभाग ने मांगी थी डीएम से रिपोर्ट
बता दें कि जिलाधिकारी को 5 जनवरी को लिखे पत्र में उत्तर प्रदेश के न्याय विभाग में विशेष सचिव राजेश सिंह ने 13 बिंदुओं पर जवाब मांगा था जिनमें जनहित में मामलों को वापस लिया जाना भी शामिल है. वहीं पत्र में मुजफ्फरनगर के एसएसपी की भी रिपोर्ट मांगी गई थी. बहरहाल पत्र में नेताओं के नाम का जिक्र नहीं है लेकिन उनके खिलाफ दर्ज मामलों की फाइल संख्या का जिक्र है. वहीं इन आरोपी नेताओं पर निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने, नौकरशाहों के काम में बाधा डालने और उनको गलत तरीके से रोकने के लिए विभिन्न धाराओं के तहत मामला अदालत में चल रहे हैं.

सीएम योगी से मिले थे बीजेपी सांसद
दरअसल पश्चिमी यूपी के एक प्रतिनिधि मंडल ने बीते 6 फरवरी को सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी. इस प्रतिनिधि मंडल में बीजेपी सांसद संजीव बालियान,विधायक संगीत सोम और किसान नेता नरेश टिकैत के अलावा मुजफ्फरनगर के अहलावत और गठवाला थाना क्षेत्र के लोग शामिल थे.
इस प्रतिनिधिमंडल ने सीएम ऑफिस को बताया कि मुज़फ्फरनगर दंगों के दौरान 500 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए थे.

जिनमें 400 के करीब आगजनी के मुकदमे थे. उन्होंने आगजनी के इन मुकदमों को फर्जी बताते हुए इसे वापिस लेने की मांग की थी. गौरतलब है कि योगी सरकार मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े 131 मामले वापस लेने जा रही है जिसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. विपक्ष सरकार के इस कदम की पहले ही आलोचना कर रहा है. अब संजीव बालियान के बयान से विपक्ष योगी सरकार पर और अधिक हमलावर हो सकता है.