प्रदेश विशेष
योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला,शहीदों के परिजनों को मिलेगी सरकारी नौकरी
लखनऊ,31/जनवरी/2018(ITNN)>>> उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में शहीद के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की मंगलवार को हुई बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। नौकरी के साथ ही पूर्व निर्धारित सहायता भी मिलती रहेगी। मंत्रिमंडल में लिए गए निर्णय की जानकारी देते हुए राज्य सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि सेना के तीनों अंगों और अद्र्धसैनिक बलों में कार्यरत अधिकारियों या जवानों के शहीद होने पर उनके परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जाएगी। 

इसके लिए शहीद का उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना जरुरी होगा। शर्मा ने बताया कि प्रस्ताव के अनुसार अन्तर्राष्ट्रीय युद्ध,आतंकवादी घटनाओं,प्राकृतिक आपदाओं या नक्सलवादी घटनाओं में शहीद होने वाले जवानों के परिजनों को यह सुविधा उपलब्ध होगी। इसके लिए नौकरी पाने का इच्छुक परिवार के सदस्य की उम्र 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। यह व्यवस्था एक अप्रैल 2017 से लागू कर दी गई है अर्थात एक अप्रैल 2017 के बाद शहीद हुए जवानों के परिजनों को सरकारी नौकरी मिलेगी।

उन्होंने बताया कि आश्रितों की क्रमवार श्रेणी में सबसे पहले पत्नी या पति,पुत्र,विधवा पुत्रवधू,3 अविवाहित पुत्रियां,दत्तक पुत्र या पुत्री और माता-पिता रखे गए हैं जबकि अविवाहित शहीद के आश्रितों में क्रमवार माता-पिता और भाई-बहन हैं। सेना के तीनों अंगों के शहीद जवानों के परिजनों को नौकरी देने के लिए सैनिक कल्याण विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है जबकि अद्र्धसैनिक बलों के शहीद जवानों के आश्रितों के लिए गृह मंत्रालय को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। शर्मा ने बताया कि सैनिक कल्याण और गृह विभाग रोस्टर के हिसाब से शहीदों के परिजनों को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराएगा। 

परिजनों को उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग से भर्ती होने वाले पदों पर नौकरी नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल ने शहीदों के परिजनों से निर्धारित फार्म पर आवेदन करने की अपेक्षा की है। उनका कहना था कि परिवार को आय का विवरण भी देना होगा। मंत्रिमंडल ने एक अन्य निर्णय के तहत बलिया के रसड़ा में 424. 06 करोड़ रुपए की लागत से 400 केवीए का एक विद्युत उपगृह बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके साथ ही अखिलेश यादव सरकार के 16 फरवरी 2016 के निर्णय को पलटते हुए परिवहन निगम की बसों में गति नियंत्रक नहीं लगाने का निर्णय लिया गया है।