प्रदेश विशेष
सड़क पर गड्ढों की वजह से हर साल देश को होता है 823 करोड़ का नुकसान
पौड़ी गढ़वाल,03/जुलाई/2018/ITNN>>> रविवार को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में एक खाई में बस गिरने से 48 लोगों की मौत हो गई है. बताया जा रहा है कि सड़क पर गड्ढों की वजह से ये दुर्घटना हुई. हालांकि दुर्घटना स्थल पर हेलीकॉप्टर से पहुंचे उत्तराखंड के सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मृतकों और घायलों के लिए मुआवजे का ऐलान तो कर दिया लेकिन जनता की मांग ये थी सीएम को हेलीकॉप्टर से नहीं बल्कि गड्ढों वाली रोड से आना चाहिए था.

तब उन्हें इसकी हकीकत का अंदाजा होता और वे जनता के दर्द समझ पाते. इस दुर्घटना के बाद अब लोकनिर्माण विभाग को सड़क बनाने के निर्देश दिए गए हैं. हर तीन किमी पर एक जेसीबी की व्यवस्था करने को कहा गया. पर बड़ा सवाल ये है कि सड़क के गड्ढे ना भरने वाले अफसरों पर केस क्यों नहीं होता? क्यों इन हादसों के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती है.

आपको बता दें कि देश में सड़क के गड्ढों के कारण हर साल 823 करोड़ रुपए का नुकसान होता है. देश में गड्ढों और खराब सड़क के कारण सालाना 95000 करोड़ का तेल फूंक दिया जाता है. कैलिफोर्निया में 2011 में सड़क में गड्ढे के कारण एक साइकिल सवार को गंभीर चोट आई थी. तब कैलिफोर्निया प्रशासन को 22 करोड़ का मुआवजा साइकिल सवार को देना पड़ा था. वहीं भारत जैसे देश में अगर कोई बड़ा हादसा भी हो जाए तब भी मात्र लाख-दो लाख का मुआवजा दिया जाता है.

गडकरी ने गड्ढों की जानकारी देने के लिए लांच किया है ऐप सुखद यात्रा
फरीदाबाद के मनोज वाधवा पिछले चार साल से गड्ढों की समस्या को समाप्त करने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने की लड़ाई लड़ रहे हैं. वाधवा ने फरीदाबाद में सड़क पर गड्ढे के कारण हुए हादसे में अपने तीन साल के मासूम बेटे पवित्र को खो दिया था. तब से वे इसके खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं.

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक सुखद यात्रा ऐप लॉन्च करते हुए भरोसा दिया था कि इस ऐप के जरिए लोग सड़क के गड्ढों की जानकारी दें और जानकारी मिलते ही सड़क के गड्ढों को तुरंत सही किया जाएगा. लेकिन सड़क पर गड्ढे के कारण अपने बेटे पवित्र को खोने वाले मनोज वाधवा बताते हैं कि फरीदाबाद में नेशनल हाइवे पर खड़े होकर गड्ढे की जानकारी देने के बाद भी नितिन गडकरी का ऐप काम नहीं करता है.

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे में भी हो गए हैं गड्ढे
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे का उद्घाटन किया था. सड़कों की बदहाल स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पहली बारिश के बाद ही इस एक्सप्रेस वे में एक फीट लंबा गड्ढा हो गया है. निर्माण में कमी के कारण बारिश का पानी नीचे तक पहुंच जाता है जिसकी वजह से उस जगह पर धीरे-धीरे गड्ढा बन जाता है. नियम के मुताबिक सड़कों पर होने वाले गड्ढे को तुरंत भरने की जिम्मेदारी एनएचएआई, राज्य सरकारों के लोक निर्माण विभाग,स्थानीय नगर निकायों यानी नगर पालिका और नगर निगम की होती है लेकिन हालिया स्थिति को देखकर लगता है .

कि सिस्टम सड़क बनाकर,उनके रखरखाव पर ध्यान नहीं देता जिससे सड़कों पर होने वाले गड्ढे बड़े हादसे की वजह बनते हैं. मनोज वाधवा की मांग है कि सड़क में गड्ढा हो तो जिम्मेदार एजेंसी और उस अफसर के खिलाफ क्यों नहीं कानूनी कदम उठाया जाए? इस बारे में जब ने भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने साफ मना कर दिया. सड़कों पर गड्ढे की वजह से होने वाले हादसों के जिम्मेदार कौन हैं,इंजीनियर या वो ठेकेदार जो सड़क बनाने का काम करते हैं. क्या जवाबदेह लोगों के खिलाफ सरकार को कोई कानून बनाने की जरूरत है?