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दुनिया के सबसे बड़े रेसक्यू ऑपरेशन को गोताखोरों ने ऐसे दिया अंजाम
मे साई,11/जुलाई/2018/ITNN>>> थाईलैंड की थाम लुआंग गुफा में 23 जून से फंसे 12 बच्चों और उनके कोच को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। 18 दिन के इस मिशन इम्पॉसिबल पर दुनियाभर की निगाहें थीं। इसे दुनिया का सबसे बड़े अद्भुत रैस्क्यू आप्रेशन माना जा रहा है। 40 थाईलैंड के और 50 दूसरे देशों के गोताखोरों ने इस ऑप्रेशन को अंजाम दिया। विशेषज्ञों तक का दावा था कि यह नामुमकिन काम है। हफ्ते भर तो अधिकारियों को यह समझने में लग गए कि उन्हें निकालें कैसे।

गुफा के प्रवेश द्वार से 3.2 कि.मी. दूर फंसे थे बच्चे
गुफा के मुख्य प्रवेश द्वार से बच्चों के फंसे होने की जगह 3.2 किलोमीटर दूर थी। इसमें कुछ हिस्सों में पानी था। अंधेरे की वजह से इसमें देख पाना भी मुश्किल था। इसके अलावा संकरे रास्ते अभियान में बड़ी रुकावट थे। थाईलैंड के अलावा अमरीका, चीन, जापान, ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया के 90 गोताखोर बचाव कार्य में लगे थे। एक हजार से ज्यादा जवान और एक्सपर्ट इस अभियान में मदद कर रहे थे।

मिशन के हीरो बने ब्रिटिश गोताखोर
ब्रिटिश गोताखोर जॉन वोलेंनथन और रिक स्टैटन मिशन के हीरो बने हैं। दोनों ब्रिटिश गोताखोरों ने पिछले सप्ताह मंगलवार को गुफा के कई किलोमीटर अंदर एक मिट्टी के टीले से सभी 13 लोगों को देखा था और उनके जिन्दा होने की पुष्टि की थी।

कैसे निकाले गए बच्चे
सबसे पहले गुफा के अंदर एक बेस बनाया गया जहां से फाइनल रैस्क्यू ऑप्रेशन चलाया जा रहा था। 8 जुलाई को यह तय किया गया कि हर बच्चे को बाहर निकालते वक्त 2 गोताखोर होंगे। एक गोताखोर बच्चे को अपने साथ लिए होगा और दूसरा उनके पीछे होगा। इस ऑप्रेशन को पूरी दुनिया का सपोर्ट मिलने के साथ ही सबसे अच्छी बात यह रही कि 17 दिन तक गुफा में रहने के बावजूद बच्चों का मैंटल हैल्थ बड़ा ही बैलेंस था। बच्चों के लापता होने के 9 दिन बाद जब पहला वीडियो सामने आया तो उसमें बच्चे मदद को देखकर काफी खुश नजर आए थे।