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21 में से 18 बैंकों में लगा पैसा घटा, क्या सरकारी दबाव में IDBI को खरीद रही है LIC
नई दिल्ली,3/जुलाई/2018/ITNN>>> केंद्र सरकार के फैसले के बाद जहां जीवन बीमा निगम (LIC) IDBI बैंक में 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने जा रहा है वहीं एक हकीकत यह भी है कि बीते दो-ढाई साल के दौरान LIC ने 21 सरकारी बैंकों में निवेश किया है और कुल 18 बैंकों में उसे घाटा उठाना पड़ रहा है. शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक LIC का देश में 21 सरकारी बैंकों में 1 फीसदी से अधिक का निवेश है. 

इन 21 बैंकों में महज तीन बैंक ऐसे हैं जो दिसंबर 2015 के स्तर के ऊपर शेयर बाजार में कारोबार कर रहे हैं वहीं 18 बैंकों का शेयर बाजार पर स्तर इस तारीख के मुकाबले गिर चुका है. लिहाजा इन बैंकों में LIC द्वारा देश की जनता के जीवन बीमा प्रीमियम का पैसा या तो कम हो चुका है या डूब चुका है.
आंकड़ों के मुताबिक सरकारी बैंकों में महज इंडियन बैंक,विजया बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ऐसे बैंक हैं जिनमें LIC का निवेश होने के बाद उसे फायदा मिल रहा है और इन बैंकों के शेयर हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं. 

वहीं बाकी के 18 बैंक जिनमें बीते 2-2.5 साल के दौरान LIC का निवेश हुआ वह शेयर बाजार में लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं. रिसर्च आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2015 से लेकर मार्च 2018 के दौरान इन 21 सरकारी बैंकों में LIC द्वारा किए गए निवेश की रकम 8 फीसदी कम हो चुकी है. यानी इन कंपनियों के शेयर में निवेश पर लगभग 8 फीसदी का नुकसान फिलहाल LIC उठा रही है. गौरतलब है कि LIC के निवेश में हुए इस घाटे का आंकड़ा तब सामने आया जब हाल ही में रिजर्व बैंक ने सभी सरकारी बैंकों को दिसंबर 2015 के बाद अपने बैड लोन का आंकलन करने का फरमान सुनाया. 

इस फरमान के बाद एकत्र हुए आंकड़ों से यह भी जाहिर हुआ कि देना बैंक, यूको बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र भी इस दौरान अपनी मार्केट वैल्यू का लगभग 60 फीसदी गंवा चुके हैं. खासबात यह भी है कि जहां सरकारी बैंकों में निवेश पर LIC को घाटा उठाना पड़ रहा है वहीं निजी बैंकों में LIC के निवेश में 50 फीसदी का इजाफा हुआ है. इनमें सबसे ज्यादा इजाफा HDFC बैंक (50 फीसदी) और YES बैंक (134 फीसदी) हुआ है. गौरतलब है कि पंजाब नेशनल बैंक में LIC की 14.2 फीसदी हिस्सेदारी है. इसके अलावा LIC की कॉरपोरेशन बैंक में 13 फीसदी और इलाहाबाद बैंक में 10 फीसदी की हिस्सेदारी है. 

वहीं IDBI, सिंडिकेट बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में LIC की 10-10 फीसदी हिस्सेदारी है. लिहाजा,इन आंकड़ों को आधार मानते हुए बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का दावा है कि LIC द्वारा IDBI बैंक में किया जाने वाला निवेश किसी सूरत में उसे मुनाफा नहीं देगा. बल्कि इस निवेश से आम आदमी के जीवन बीमा प्रीमियम की राशि पर अधिक खतरा मंडराने लगेगा. गौरतलब है कि पिछले हफ्ते इंश्योरेंस क्षेत्र के नियामक IRDAI ने LIC को बैड लोन में डूबी IDBI बैंक के 51 फीसदी शेयरों को खरीदने की मंजूरी दे दी है. 

यह मंजूरी  केंद्र सरकार की संकटग्रस्त IDBI बैंक को उबारने के लिए LIC के फंड का इस्तेमाल करने की पहल पर दी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक IDBI बैंक में 51 फीसदी शेयर खरीदने के लिए LIC को कई चरणों में कुल 11 से 13 हजार करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे. हालांकि इस निवेश के बावजूद LIC  को बैंक चलाने के लिए बोर्ड पर काबिज होने का मौका नहीं मिलेगा. गौरतलब है कि IDBI बैंक में  केंद्र सरकार की 81 फीसदी हिस्सेदारी है और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पिछले साल संसद में बयान दिया था कि सरकार अपनी हिस्सेदारी को कम कर 50 फीसदी के नीचे ले जाने की कवायद करेगी. 

केंद्र सरकार के फैसले के बाद जहां जीवन बीमा निगम (LIC) IDBI बैंक में 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने जा रहा है वहीं एक हकीकत यह भी है कि बीते दो-ढाई साल के दौरान LIC ने 21 सरकारी बैंकों में निवेश किया है और कुल 18 बैंकों में उसे घाटा उठाना पड़ रहा है. शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक LIC का देश में 21 सरकारी बैंकों में 1 फीसदी से अधिक का निवेश है. इन 21 बैंकों में महज तीन बैंक ऐसे हैं जो दिसंबर 2015 के स्तर के ऊपर शेयर बाजार में कारोबार कर रहे हैं वहीं 18 बैंकों का शेयर बाजार पर स्तर इस तारीख के मुकाबले गिर चुका है. 

लिहाजा इन बैंकों में LIC द्वारा देश की जनता के जीवन बीमा प्रीमियम का पैसा या तो कम हो चुका है या डूब चुका है. आंकड़ों के मुताबिक सरकारी बैंकों में महज इंडियन बैंक, विजया बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ऐसे बैंक हैं जिनमें LIC का निवेश होने के बाद उसे फायदा मिल रहा है और इन बैंकों के शेयर हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं. वहीं बाकी के 18 बैंक जिनमें बीते 2-2.5 साल के दौरान LIC का निवेश हुआ वह शेयर बाजार में लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं. रिसर्च आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2015 से लेकर मार्च 2018 के दौरान इन 21 सरकारी बैंकों में LIC द्वारा किए गए निवेश की रकम 8 फीसदी कम हो चुकी है. 

यानी इन कंपनियों के शेयर में निवेश पर लगभग 8 फीसदी का नुकसान फिलहाल LIC उठा रही है. गौरतलब है कि LIC के निवेश में हुए इस घाटे का आंकड़ा तब सामने आया जब हाल ही में रिजर्व बैंक ने सभी सरकारी बैंकों को दिसंबर 2015 के बाद अपने बैड लोन का आंकलन करने का फरमान सुनाया. इस फरमान के बाद एकत्र हुए आंकड़ों से यह भी जाहिर हुआ कि देना बैंक, यूको बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र भी इस दौरान अपनी मार्केट वैल्यू का लगभग 60 फीसदी गंवा चुके हैं. खासबात यह भी है कि जहां सरकारी बैंकों में निवेश पर LIC को घाटा उठाना पड़ रहा है वहीं निजी बैंकों में LIC के निवेश में 50 फीसदी का इजाफा हुआ है. 

इनमें सबसे ज्यादा इजाफा HDFC बैंक (50 फीसदी) और YES बैंक (134 फीसदी) हुआ है. गौरतलब है कि पंजाब नेशनल बैंक में LIC की 14.2 फीसदी हिस्सेदारी है. इसके अलावा LIC की कॉरपोरेशन बैंक में 13 फीसदी और इलाहाबाद बैंक में 10 फीसदी की हिस्सेदारी है. वहीं IDBI, सिंडिकेट बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में LIC की 10-10 फीसदी हिस्सेदारी है. लिहाजा,इन आंकड़ों को आधार मानते हुए बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का दावा है कि LIC द्वारा IDBI बैंक में किया जाने वाला निवेश किसी सूरत में उसे मुनाफा नहीं देगा. 

बल्कि इस निवेश से आम आदमी के जीवन बीमा प्रीमियम की राशि पर अधिक खतरा मंडराने लगेगा. गौरतलब है कि पिछले हफ्ते इंश्योरेंस क्षेत्र के नियामक IRDAI ने LIC को बैड लोन में डूबी IDBI बैंक के 51 फीसदी शेयरों को खरीदने की मंजूरी दे दी है. यह मंजूरी  केंद्र सरकार की संकटग्रस्त IDBI बैंक को उबारने के लिए LIC के फंड का इस्तेमाल करने की पहल पर दी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक IDBI बैंक में 51 फीसदी शेयर खरीदने के लिए LIC को कई चरणों में कुल 11 से 13 हजार करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे. 

हालांकि इस निवेश के बावजूद LIC  को बैंक चलाने के लिए बोर्ड पर काबिज होने का मौका नहीं मिलेगा. गौरतलब है कि IDBI बैंक में  केंद्र सरकार की 81 फीसदी हिस्सेदारी है और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पिछले साल संसद में बयान दिया था कि सरकार अपनी हिस्सेदारी को कम कर 50 फीसदी के नीचे ले जाने की कवायद करेगी.