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कठिन हुई लोकपाल की नियुक्ति
नई दिल्ली,28/जुलाई/2018/ITNN>>> सरकारी भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए देश के पहले लोकपाल का चयन एक कठिन कार्य बन गया है और अब यह स्पष्ट हो गया है कि अगले आम चुनाव से पहले लोकपाल की नियुक्ति नहीं हो सकती। लोकपाल का चयन करने के लिए 19 जुलाई को हुई बैठक में प्रत्येक सदस्य को 5 नाम सुझाने के लिए कहा गया था। चूंकि लोकपाल चयन समिति में 5 सदस्य हैं तो हिसाब से 25 सदस्यों के नाम सामने आएंगे। 

सर्च कमेटी 25 सदस्यों में से लोकपाल के लिए नाम की सिफारिश करेगी। सर्च कमेटी के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे जो इस कमेटी में 8 सदस्यों को शामिल करेंगे। हालांकि लोकपाल की नियुक्ति में देरी होने पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई है लेकिन सरकार फिर भी विलंब कर रही है। लोकपाल चयन समिति जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा,लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और प्रसिद्ध न्यायविद् मुकुल रोहतगी सम्मिलित हैं।

अब कुछ समय बाद अगस्त में मिलेंगे। चूंकि लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े पूर्णकालिक सदस्य नहीं हैं इसलिए उन्हें विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में बुलाया गया था परंतु उन्होंने बैठक में आने से इन्कार कर दिया। चयन समिति को अब 20 सदस्यों के नामों पर विचार करना होगा। दिलचस्प यह है कि लोकपाल चयन समिति की पहली बैठक में भाग लेने वाले 4 सदस्यों को सर्च कमेटी के लिए 5 सक्षम व्यक्तियों के नाम तय करना मुश्किल था। 

2 सदस्यों को लगा कि उन्हें नाम तय करने के लिए समय चाहिए जबकि प्रधानमंत्री जवाब के लिए मुकुल रोहतगी की तरफ देखते रहे। रोहतगी ने सुझाव दिया है कि समाज के सभी कोनों के विशेषज्ञों से बात की जाएगी। खडग़े भले ही बैठक में भाग लेने के लिए तैयार न हों पर सरकार उनसे भी विशेष अनुरोध करेगी कि वह नाम जरूर भेजें लेकिन ऐसा लगता है कि खडग़े पूर्ण सदस्य नहीं बनाए जाने के विरोध स्वरूप सर्च कमेटी के लिए नाम नहीं भेजेंगे।