प्रमुख समाचार
अमेरिका के साथ 2+2 वार्ता से कई मुद्दों के सुलझने की उम्मीद
नई दिल्ली/वॉशिंगटन,22/जून/2018/ITNN>>> भारत और अमेरिका के बीच पहली 2+2 वार्ता, यानी एक साथ दोनों मुल्कों के रक्षा और विदेश मंत्रियों की बातचीत,6 जुलाई को वॉशिंगटन में होगी. रणनीतिक साझेदार दोनों देशों के बीच इस वार्ता में सामरिक सहयोग के अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के मुद्दों पर भी चर्चा होगी.

स्वराज और सीतारमण करेंगी भारत की नुमाइंदगी
विदेश मंत्रालय के मुताबिक पहली बार हो रही इस 2+2 वार्ता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जून 2017 में हुई वार्ता में सहमति बनी थी. पहली बार रक्षा और विदेश मामलों पर हो रही इस संयुक्त वार्ता में भारत की नुमाइंदगी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी. वहीं अमेरिका की तरफ से रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस और विदेश मंत्री माइक पोम्पेओ शरीक होंगे.

दोनों देशों के बीच है कई मुद्दों पर मतभेद
भारत और अमेरिका के बीच इस नए फॉर्मेट में वार्ता ऐसे वक्त हो रही है जब दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रिश्तों में कई मुद्दों पर मतभेद हैं एक ओर जहां WTO में एक-दूसरे के खिलाफ तलवारें खीची हैं वहीं H1B वीज़ा नियमों में बदलाव पर भी चिंताएं बरकरार हैं. दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक तनाव भी काफी बढ़ा हुआ है. हालांकि,इस वार्ता से पूर्व अगले हफ्ते एक उच्च स्तरीय अमेरिकी वाणिज्य प्रतिनिधिमंडल भारत आ रहा है.

रूस पर प्रतिबंध भी बना है गले की फांस
रूस के खिलाफ लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंध भी नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच फांस बन रहे हैं. इन पाबंदियों के कारण रूस के साथ होने वाले भारत के कई हथियार सौदों के लिए परेशानी खड़ी हुई है. अमेरिका इस बात का दबाव भी बना रहा है कि भारत अपनी सामरिक ज़रूरतों के लिए रूसी हथियारों पर निर्भरता कम करे. वहीं,भारत अपनी रणनीतिक ज़रूरतों और सामरिक आवश्यकताओं के मोर्चे पर किसी भी एक पलड़े पर झुकने के हक में नहीं है.

कॉमकोस या संचार सामझौते पर भी चर्चा होगी
माना जा रहा है कि अगले महीने होने वाली वार्ता में दोनों देशों के बीच काफी समय से लंबित कॉमकोस या संचार सामझौते पर भी चर्चा होगी. सूत्रों के मुताबिक इस मामले पर दोनों देशों के बीच सामझौते की भाषा पर आदान-प्रदान हुआ है. बताते चलें कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच संचार उपकरण संचालन में तालमेल संबंधी इस समझौते को लेकर भारतीय खेमे की कई चिंताएं हैं.

कॉमकोस सामझौता भारत के लिए मूलभूत ज़रूरत
भारत अपने सैन्य संचार को किसी दूसरे मुल्क के लिए खोलने को राजी नहीं है. वहीं भारत को उच्च तकनीक वाले संचार संसाधनों की आपूर्ति के लिए कॉमकोस सामझौते को अमेरिका मूलभूत ज़रूरत करार देता है. बीते दिनों अमेरिका का ट्रंप प्रशासन में अमेरिकी विदेश विभाग की राजनैतिक और सैन्य मामलों की प्रभारी टीना क़ैदनोव दिल्ली आई थी.

उम्मीद की जा रही है कि इस 2+2 वार्ता से कई द्विपक्षीय मुद्दों को सुलझाने का रास्ता निकलेगा. इसमें भारत के गार्जियन युद्धक ड्रोन विमान खरीद का प्रस्ताव भी शामिल है. त्रिपक्षीय मालाबार नौसेना अभ्यास के बाद हो रही इस वार्ता के जरिए अमेरिका की कोशिश हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में भारत के साथ साझेदारी बढ़ानी की भी होगी.