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पीएम मोदी के मन की बात,कहा- GST ईमानदारी का उत्सव,जनशक्ति से सपना पूरा हुआ
नई दिल्ली,24/जून/2018/ITNN>>> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 45वीं बार देश से रोडियो कार्यक्रम मन की बात के जरिए देश से बात की, पीएम मोदी ने जीएसटी की तारीफ की. प्रधानमंत्री ने कहा कि एक साल होने से पहले की जनशक्ति की बदौलत वन नेशन,वन टैक्स का सपना पूरा हुआ. इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने कई अन्य मुद्दों पर अपनी बात रखी,साथ ही उन्होंने मन की बात कार्यक्रम में सवाल पूछ वालों और सुझाव देने वालों का भी धन्यवाद किया.

जीएसटी पर क्या बोले प्रधानमंत्री मोदी?
जीएसटी की तारीफ करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,जीएसटी को एक साल पूरा होने वाला है एक राष्ट्र,एक टैक्स देश के लोगों का सपना था,वो आज हक़ीक़त में बदल चुका है. एक राष्ट्र,एक कर सुधार,इसके लिए अगर मुझे सबसे ज्यादा किसी को क्रेडिट देना है तो मैं राज्यों को देता हूं. प्रधानमंत्री ने कहा, जीएसटी से पहले देश में 17 अलग-अलग प्रकार के टैक्स हुआ करते थे लेकिन इस व्यवस्था में अब सिर्फ़ एक ही टैक्स पूरे देश में लागू है. 

जीएसटी ईमानदारी की जीत है और ईमानदारी का एक उत्सव भी है. पहले देश में काफ़ी बार टैक्स के मामले में इंस्पेक्टरराज की शिकायतें आती रहती थीं. जीएसटी में इंस्पेक्टर की जगह आईटी ने ले ली है. रिटर्न से लेकर रीफंड तक सब कुछ ऑनलाइन इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से होता है. जीएसटी के आने से चेक पोस्ट ख़त्म हो गए और माल सामानों की आवाजाही तेज़ हो गई, जिससे न सिर्फ़ समय बच रहा है बल्कि लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भी इसका काफ़ी लाभ मिल रहा है.

प्रधानमंत्री ने खेल भावना की तारीफ की
भारतीय क्रिकेट टीम की तारीफ की,प्रधानमंत्री ने कहा,अभी कुछ दिन पहले बेंगलुरु में एक ऐतिहासिक क्रिकेट मैच हुआ. आप लोग भली-भांति समझ गए होंगे कि मैं भारत और अफगानिस्तान के टेस्ट मैच की बात कर रहा हूं. भारतीय टीम ने कुछ ऐसा किया,जो पूरे विश्व के लिए एक मिसाल है. भारतीय टीम ने ट्रॉफी लेते समय एक विजेता टीम क्या कर सकती है,उन्होंने क्या किया. भारतीय टीम ने ट्रॉफी लेते समय,अफगानिस्तान की टीम जो कि पहली बार अन्तर्राष्ट्रीय मैच खेल रही थी,अफगानिस्तान की टीम को आमंत्रित किया और दोनों टीमों ने साथ में फोटो ली. खेल भावना क्या होती हैइस एक घटना से हम अनुभव कर सकते हैं.

21 जून को अलग ही नजारा था,योग जोड़ने का काम करता है
प्रधानमंत्री ने 21 जून को संपन्न हुए योग दिवस का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा,इस 21 जून को चौथे योग दिवस पर एक अलग ही नज़ारा था,पूरी दुनिया एकजुट नज़र आयी. विश्व-भर में लोगों ने पूरे उत्साह और उमंग के साथ योगाभ्यास किया. ब्रसेल्स हो,यूरोपियन पार्लियामेंट हो,न्यू यॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय हो,जापानी नौ-सेना के लड़ाकू जहाज़ हों, सभी जगह लोग योग करते नज़र आए. सऊदी अरब में पहली बार योग का ऐतिहासिक कार्यक्रम हुआ और मुझे बताया गया है कि बहुत सारे आसनों का प्रदर्शन तो महिलाओं ने किया.

प्रधानमंत्री ने कहा,लद्दाख की ऊँची बर्फीली चोटियों पर भारत और चीन के सैनिकों ने एक-साथ मिलकर के योगाभ्यास किया. योग सभी सीमाओं को तोड़कर, जोड़ने का काम करता है. सैकड़ों देशों के हजारों उत्साही लोगों ने जाति, धर्म, क्षेत्र, रंग या लिंग हर प्रकार के भेद से परे जाकर इस अवसर को एक बहुत बड़ा उत्सव बना दिया. यदि दुनिया भर के लोग इतने उत्साहित होकर योग दिवस के कार्यक्रमों में भाग ले रहे थे तो भारत में इसका उत्साह अनेक गुना क्यों नहीं होगा.

श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भी याद किया
प्रधानमंत्री ने कहा,डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी कई क्षेत्रों से जुड़े रहे लेकिन जो क्षेत्र उनके सबसे करीब रहे वे थे शिक्षा, प्रसाशन और संसदीय मामले, बहुत कम लोगों को पता होगा कि वे कोलकाता विश्वविद्यालय के सबसे कम उम्र के वाइस चांसलर भी थे. जब वे वाइस चांसलर बने थे तब उनकी उम्र मात्र 33 वर्ष थी.

प्रधानमंत्री ने बताया,बहुत कम लोग ये जानते होंगे कि 1937 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के निमंत्रण पर श्री गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने कोलकाता विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह बांग्ला भाषा में संबोधित किया था. यह पहला अवसर था,जब अंग्रेजों की सल्तनत थी और कोलकाता विश्वविद्यालय में किसी ने बांग्ला भाषा में दीक्षांत समारोह को संबोधित किया था. बता दें कि 6 जुलाई को श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती है,मन की बात में एक कॉलर ने प्रधानमंत्री से इस बारे में बोलने को कहा था.