Mohan Yadav की सरकार ने भावांतर योजना को किसान हित की बड़ी पहल के रूप में आगे बढ़ाया है। इसका सीधा मकसद है—अगर मंडी में फसल का दाम MSP से कम मिलता है, तो उस अंतर की रकम सरकार सीधे किसान के बैंक खाते में जमा करे। यानी बाजार में नुकसान हो, तब भी किसान खाली हाथ न लौटे।
सोयाबीन जैसे फसल में अक्सर दाम गिर जाते हैं। ऐसे में किसान को लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है। भावांतर योजना इस नुकसान की भरपाई करती है। हाल के आंकड़ों के अनुसार लाखों किसानों को करोड़ों रुपये सीधे उनके खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। इससे खेती के खर्च पूरे करने और अगली फसल की तैयारी में मदद मिलती है।
इस योजना की सबसे बड़ी ताकत है—सीधा भुगतान। कोई बिचौलिया नहीं, कोई लंबी प्रक्रिया नहीं। पैसा सीधे खाते में आता है। इससे किसानों का भरोसा बढ़ता है।
लेकिन कुछ सवाल भी हैं। अगर हर साल दाम MSP से नीचे रहे तो सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। लंबे समय में यह मॉडल कितना टिकाऊ रहेगा, यह देखना होगा। साथ ही, यह भी जरूरी है कि भुगतान समय पर और सही तरीके से हो।
सीधी बात यह है कि भावांतर योजना किसानों को तुरंत राहत देती है। अगर इसे पारदर्शिता और वित्तीय संतुलन के साथ चलाया जाए, तो यह मध्य प्रदेश में खेती को स्थिर और सुरक्षित बनाने की मजबूत पहल साबित हो सकती है।


























