मुख्य चिकित्सा अधिकारी को रोकने अब जातिवाद पर उतरे षडयंत्रकारी
-राजपूत करणी सेना के पदाधिकारी ने लगाए आरोप, विभाग में मची खलबली
ग्वालियर
शासन के कार्यालयों में बढ़ते भ्रष्टाचार पर रोक लगाने वाले अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ रही हैं, जिसका कारण कार्यालयों में तैनात कर्मचारियों का राजनीतिक गतिविधियों में सम्मिलित होकर संरक्षण प्राप्त कर लेना है। जिसके बल पर वह विभागीय अधिकारियों पर दबाव बनाकर उनके मनमाना काम करवाने की जुगत करते रहते हंै और अगर काम नहीं होता है तो उन पर आरोप जड़वाने के लिए मदद लेते हैं। कुछ ऐसा ही मामला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को लेकर सामने आ रहा है, जहां षडयंत्रकारी उन पर जातिवाद का आरोप लगवा रहे हैं।
जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एमएस सगर की पदस्थापना के बाद उनके कार्यालय में बड़ी कार्रवाईयां शुरु हो गई थी। जिसमें कई कर्मचारियों की गड़बड़ी पकड़ने के साथ ही उन्होंने आउटसोर्स कर्मचारियों को लेकर बड़ी गड़बड़ी को पकड़ते हुए उन्होंने शासन की मंशा और काम की स्थिति को देखते हुए कर्मचारी प्रदाता कंपनियों को जरुरत के ही कर्मचारी रखने के लिए कहा। जिसके बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में हंगामें का नजारा दिखने लगा। इस हंगामें का असर न होते देख षडयंत्रकारियों ने राजपूत करणी सेना के पदाधिकारियों से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एमएस सगर पर जातिवाद का आरोप लगाया।
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सोशल मीडिया पर हुआ वायरल
राजपूत करणी सेना के पदाधिकारी का बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और उसमें वह यह कहते हुए नजर आए कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एमएस सगर एससी-एसटी वर्ग के कर्मचारियों को कार्यालय में पदस्थ कर रहे हैं और सवर्ण समाज के कर्मचारियों को हटा रहे हैं।
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छवि खराब करने की कोशिश
इस मामले में विभागीय सूत्रों की मानें तो यह सब हंगामा डॉ. एमएस सगर की छवि को खराब करने का प्रयास है। जिसका कारण उनके द्वारा की जा रही कार्रवाईयों से बड़े हितों पर कुठाराघात होना है।
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रोटेशन शासन का नियम
विभागीय संरचना को लेकर शासन का नियम है कि कोई भी कर्मचारी किसी भी शाखा में तीन साल से अधिक नहीं रहना चाहिए। जबकि वर्तमान में हटाए गए कर्मचारी कई-कई सालों से उसी शाखा को देख रहे थे। लेकिन कमाईवाली जगहों से हटाने की वजह से षडयंत्र का ताना-बाना बुना जाने लगा है।
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काम नहीं फिर भी वेतन
आउट सोर्स मामले में मिली जानकारी के अनुसार ऐसे कर्मचारियों की बहुतायत थी, जिनके द्वारा काम की बजाय नेतागिरी की जा रही थी और बिना काम के ही वेतन लिया जा रहा था। जिसका कारण संख्या से अधिक कर्मचारियों को वहां पदस्थ किया जाना था।
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सुलगता सवाल
इस मसले में सुलगता सवाल है कि आखिर शासकीय विभागों में जातिवाद हो रहा है। क्यों जिला प्रशासन के कार्यालयों में जातिवाद है अथवा जातिवाद का जो आरोप लगाया गया है वह कुत्सित मानसिकता का द्योतक है और गाहे बगाहे कर्मचारियों के बीच विद्वेष बढ़ाने का मसला है।
इनका कहना है:
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी पर लगाया गया आरोप भ्रामक है और यह शासन की मंशा के विपरीत है, हम इसको लेकर ज्ञापन भी देने जा रहे हैं।
रणवीर सिंह सिकरवार
जिलाध्यक्ष, स्वास्थ्य कर्मचारी संघ
कौन क्या आरोप लगा रहा है? इसके बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है, मेरा काम शासन के आदेश और निर्देशों का पालन करना है।
डॉ. एमएस सगर
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, ग्वालियर
प्रदेश में चहुंओर सरेआम वसूली, आंख मीचकर सो रहे जोगा
-परिवहन विभाग के चैक नाके बने लूट के अड्डे, शिकायतों को डाल रहे कचरे के ढेर में
सरकार और शासन की मंशा भ्रष्टाचार को कम करने हो, मगर यह बात कागजों तक ही सिमटकर रह गई प्रतीत होती है। जिसका कारण परिवहन विभाग में चल रही व्यवस्था है। जिसके चलते प्रदेश में चहुंओर सरेआम वसूली का सितम जारी है और परिवहन आयुक्त उमेश जोगा आंख मींचकर सोते हुए नजर आ रहे हैं।
प्रदेश के परिवहन विभाग में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने परिवहन नाकों को खत्म करते हुए वाहन जांचने के लिए चैक पोस्ट बनवा दिए थे। जिसमें वाहनों की जांच कर उनको निकलने दिया जाना था। लेकिन इन चैक नाकों पर वर्तमान में जमकर उगाही का काम चल रहा है और इसके दर्जनों वीडियों सोशल मीडिया पर चल रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद किसी तरह की सुगबुगाहट नजर नहीं आ रही है। बल्कि धड़ल्ले से अवैध वसूली का कारोबार चरम पर है।
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लठैत अभी भी मौजूद
परिहवन चैक नाकों पर भले ही होमगार्ड के जवानों को लगाया गया है। लेकिन उनका असली काम अभी भी निजी लठैत ही देख रहे हैं। जिनको वर्दी पहनाकर वहां खड़ा कर दिया जाता है और रात के समय इन नाकों पर उन्हीं का कब्जा होता है।
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चिरुला और सिकंदरा पर खुलेेआम उगाही
प्रदेश के चिरुला और सिकंदरा पर खुलेआम उगाही का दौर चल रहा है। जिसमें वहां पर तैनात परिवहन विभाग के अधिकारियों द्वारा अपने निजी लोगों को लगा रखा है। जो कि वहां से निकल रहे वाहनों से एंट्री वसूलने का काम कर रहे हैं।
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500 से 1500 तक वसूली
चैक नाकों पर हो रही वसूली 500 से 1500 रुपए तक हो रही है। जिसमें वाहनों की स्थिति को देखकर वसूली की जा रही है। वहीं अब इसमें सवारी वाहनों को भी निशाना बनाया जा रहा है। इसके चलते कई जगह झगड़े की स्थिति नजर आई है।
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शिकायतें जमींदोज
अवैध उगाही को लेकर परिवहन आयुक्त कार्यालय से लेकर कैंप कार्यालय तक पहुंची शिकायतें ही उसके गलियारों में खो गई है और महीनों बीतने के बाद भी कार्रवाईयां नदारद है। जबकि शिकायत शाखा देख रहे किरन शर्मा गोल-मोल जबाब देने के अलावा कुछ नहीं कर पाते हैं।
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फ्लाइंग पर उगाही
प्रदेश में ट्रांसपोर्टरों को लूटने का दो तरफा प्लान चल रहा है। जहां एक ओर परिवहन चैक नाकों पर वसूली हो रही है तो दूसरी तरफ फ्लाइंग चैक पाइंट बनाकर निकल रहे ट्रक-टेंकरों से वसूली करते हुए देखे जा सकते हैं। जिसको लेकर कई ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि पहले सिर्फ परिवहन नाके पर ही देना पड़ता था। लेकिन अब दो तरफ मार चल रही है।
नेट से परिवहन आयुक्त कार्यालय का फोटो लगावें
























