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इंदौर मौतों पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख, सरकार का जवाब असंवेदनशील, शहर की छवि को हुआ नुकसान

Insight TV Admin by Insight TV Admin
January 6, 2026
in मध्य प्रदेश
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इंदौर मौतों पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख, सरकार का जवाब असंवेदनशील, शहर की छवि को हुआ नुकसान
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 इंदौर 

 मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौतों और बीमारी के मामले में बेहद तल्ख टिप्पणी (MP High Court on Indore Water Crisis) की है। एमपी हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में मामले की सुनवाई चल रही है जिसमें कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि देश के सबसे स्वच्छ शहर में ऐसा हो रहा, बहुत दुखद है। देश ही नहीं विदेश तक में शहर की छवि बिगड़ी है। देश का नाम खराब हो रहा है।
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से पैदा हुआ स्वास्थ्य संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। दूषित पानी ने अब तक 17 लोगों की जान ले ली है और 110 से अधिक लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। यह केवल बीमारी नहीं, बल्कि प्रशासन और न्याय की चुनौती भी बन चुका है। हर दिन नए मरीज सामने आ रहे हैं, हाई कोर्ट में सुनवाई हो रही है और प्रशासन राहत पहुंचाने में जुटा है। क्या इंदौर के लोग अब सुरक्षित पानी की उम्मीद कर पाएंगे, यह सवाल सभी के सिर पर मंडरा रहा है। 

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल से हुई मौतों को लेकर मंगलवार (6 जनवरी) को एमपी हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि इस घटना ने शहर की छवि को बहुत नुकसान पहुंचाया है। इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर है.

कोर्ट ने कहा कि पीने का पानी ही अगर दूषित हो तो यह बेहद गंभीर चिंता का विषय है। हम इस मामले में मुख्य सचिव को सुनना चाहते हैं, क्योंकि यह समस्या सिर्फ शहर के एक हिस्से तक सीमित नहीं है। दरअसल, पूरे इंदौर शहर का पीने का पानी सुरक्षित नहीं है।

खास बात यह की कोर्ट ने अगली सुनवाई में मध्य प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी को वर्चुअली हाजिर होने को कहा है। अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी

बता दें, दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। अभी अस्पतालों में 110 मरीज भर्ती हैं। अब तक कुल 421 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती किया जा चुका है। इनमें से 311 मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज किए जा चुके हैं। आईसीयू में 15 मरीजों का इलाज चल रहा है।

तीसरी जनहित याचिका, जिम्मेदारी तय करने की मांग

मामले में दायर तीसरी जनहित याचिका भी हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
भागीरथपुरा जैसा स्वास्थ्य संकट मप्र में पहली बार

बता दें इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल संकट बना हुआ है। उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए हैं। अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। अभी अस्पतालों में 110 मरीज भर्ती हैं। 15 का आइसीयू में इलाज चल रहा है।

इस बीच, भोपाल से इंदौर पहुंची स्टेट इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (एसआइडीएसपी) टीम के प्रमुख डा. भागवत भार्गव ने कहा कि भागीरथपुरा जैसा स्वास्थ्य संकट मध्य प्रदेश में पहली बार सामने आया है। उन्होंने बताया कि इतने कम समय में, इतने सीमित क्षेत्र में बड़ी संख्या में मरीजों का सामने आना और महामारी (एपिडेमिक) जैसी स्थिति बनना बेहद असाधारण और चिंताजनक है।
कांग्रेस का प्रदर्शन

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सहित 10 कांग्रेस नेताओं को भागीरथपुरा में जाने की अनुमति मिल गई है। ये सभी बाइक से क्षेत्र का दौरा करेंगे। इसके अलावा कांग्रेस ने शाम को कैंडल मार्च और हर वार्ड में रैली निकालने की घोषणा की है।

उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए हैं। इनमें से 6 मरीजों को अरबिंदो हॉस्पिटल रेफर किया गया है।

आखिरकार इन्दौर प्रशासन ने 17 मौतें मानी

भागीरथपुरा (Bhagirathpura) सहित प्रभावित क्षेत्रों में 17 मौतों को स्वीकारते हुए प्रशासन (administration)  ने सभी मृतकों के परिजनों (Finally) को दो-दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान कर दी।

 कलेक्टर के निर्देश पर संबंधित अधिकारियों ने मृतकों के परिजनों को चैक वितरित किए। प्रशासन का कहना है कि जैसे-जैसे मृतकों की जांच रिपोर्ट सामने आती रही, चैक तैयार किए जाते रहे और उन्हें कल वितरित किया गया। क्षेत्रवासियों ने इस बात से भी राहत की सांस ली कि आखिरकार उनके परिजनों को मृतक की सूची में शामिल कर लिया गया। इन 17 लोगों की मौत हालिया बीमारी और दूषित जल से जुड़ी बताई जा रही थी। मृतकों में बुजुर्ग, महिलाएं और एक कम उम्र का बच्चा भी शामिल है। अधिकांश मामलों में उल्टी-दस्त और संक्रमण के लक्षण सामने आए थे, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन जान नहीं बच सकी। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि सभी मामलों की जांच की गई। जिन-जिन के मामलों की पुष्टि होती गई चैक दिए गए हैं। प्रशासन पूरी मुस्तैदी से यहां के रहवासियों की मदद के लिए तैनात है। वहीं नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग को क्षेत्र में शुद्ध पेयजल आपूर्ति, टंकियों की सफाई और दवा वितरण के निर्देश दिए गए हैं।

इनको मिली 2- 2 लाख की मदद
उर्मिला पति अलगू राम, मंजुला पति दिगंबर बाघे, सीमा पति गौरीशंकर, अवयान पिता सुनील साहू, तारारानी कोरी, नंदलाल सिद्धार्थ पाल, उमा बिहारीलाल कोरी, संतोष पिता कल्याण ,सुमित्रादेवी पति रामेश्वर दास, गोमती पति गोपाल, अशोक पिता मोतीलाल, रामकली पति जगदीश, शंकरलाल जीवनलाल बरेडे, श्रवण पिता नाथू व गीताबाई ध्रुवकर को देर शाम तक चैक का वितरण कर दिया गया।

याचिकाकर्ता बोले- सप्लाई हो रहा पानी दूषित

31 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को यह निर्देश दिया था कि नागरिकों को स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इस पर एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी है कि प्रभावित क्षेत्र में अब भी जो पानी सप्लाई किया जा रहा है, वह दूषित है, न कि स्वच्छ और पीने योग्य।

15  जनवरी को अगली सुनवाई 

हाई कोर्ट द्वारा मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को वीडियो कांफ्रेंस के जरिए तलब किया गया. कोर्ट ने पूरे प्रदेश में पानी को लेकर चिंता जताई है. वहीं, स्टेटस रिपोर्ट में 4 मौत दिखाने को लेकर सरकार को फटकार भी लगाई है. जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अगली तारीख 15 जनवरी तय की है. 

यदि शिकायतें सुन लेते तो ये नौबत नहीं आती

अन्य याचिकाओं में यह मुद्दा भी उठाया गया है कि इस घटना से पहले ही स्थानीय निवासियों की ओर से कई शिकायतें की गई थीं, लेकिन प्रशासन ने उन पर कोई संज्ञान नहीं लिया। अगर समय रहते इन शिकायतों पर संज्ञान लिया गया होता और उचित रोकथाम के कदम उठाए गए होते तो यह घटना ही नहीं होती।

सीनियर काउंसिल ने यह भी कोर्ट को बताया कि 2022 में महापौर द्वारा पीने के पानी की आपूर्ति के लिए नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन फंड जारी न होने के कारण यह काम अब तक नहीं हो पाया।

प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट पर एक्शन नहीं लिया

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी दलील दी गई कि साल 2017-18 में इंदौर के अलग-अलग इलाकों से पानी के 60 सैंपल लिए गए थे, जिनमें से 59 सैंपल पीने योग्य नहीं पाए गए। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इस रिपोर्ट के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।

उन्होंने यह भी तर्क रखा कि इस मामले में संबंधित अधिकारी केवल नागरिक (सिविल) जिम्मेदारी के ही नहीं, बल्कि आपराधिक जिम्मेदारी के भी दोषी हैं। याचिकाकर्ताओं ने इस पूरे मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग की है।

हाईकोर्ट बोला- एक नई स्टेटस रिपोर्ट पेश करें

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को निर्देश दिया है कि वे इस मामले में अपना जवाब दाखिल करें और एक नई स्टेटस रिपोर्ट पेश करें। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में स्वच्छ पेयजल का अधिकार भी शामिल है।

हाईकोर्ट ने इस मामले से जुड़े मुद्दों को 7 श्रेणियों में बांटा है…

    प्रभावित लोगों के लिए तत्काल और आपात निर्देश।
    रोकथाम और सुधारात्मक उपाय।
    जिम्मेदारी तय करना।
    अनुशासनात्मक कार्रवाई।
    मुआवजा।
    स्थानीय निकायों को निर्देश।
    जन-जागरूकता और पारदर्शिता।

फेक न्यूज के मामले में एक आवेदन मनोज भरने की ओर से लगाया गया। इसमें कहा गया कि इस मामले में किसी भी तरह का गलत प्रकाशन नहीं किया जाए। इस पर अन्य वकीलों की ओर से दलील दी गई कि इस बात की पुष्टि करना कि क्या प्रकाशन सही है, क्या गलत, यह तय कर पाना मुश्किल है।

उन्होंने तर्क दिया कि जैसे कोरोना के दौरान रोज बुलेटिन जारी किया जाता था, इस केस में भी वैसा ही किया जाए। हर दिन की रिपोर्ट कलेक्टर के जरिए डिक्लेयर करें।

आज सुनवाई में ट्रेजर फैंटेसी टाउनशिप की ओर से भी एक जनहित याचिका में नया आवेदन लगाया गया। इसमें बताया गया कि यहां के रहवासी भी 1 साल से दूषित पानी की समस्या से बुरी तरह जूझ रहे हैं। कई बार शिकायत की, लेकिन नगर निगम ने ध्यान नहीं दिया। कोर्ट ने इस मामले में समस्या और निराकरण को लेकर स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।

इसमें एक जनित याचिका हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश ईनानी द्वारा लगाई गई है जिसमें भागीरथपुरा मामले में घटना की जांच, शुद्ध जल उपलब्ध कराने की मांग की गई है

एक याचिका महेश गर्ग की ओर से लगाई गई है इसमें शहर की पानी सप्लाई करने वाली सभी टंकियां को साफ करने के मामले में निर्देश देने की अपील की गई है इसमें एडवोकेट मनीष यादव है

पिछली सुनवाई में कुल 4 मौतें बताई गई थीं

2 जनवरी को हुई सुनवाई में बताया गया था कि अब तक कुल 4 मौतें हुई हैं। वहीं, नगर निगम ने अलग से स्टेटस रिपोर्ट पेश की थी। इसमें भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल आपूर्ति से जुड़े मामलों की स्थिति बताई गई।

नगर निगम ने कोर्ट को बताया था कि संबंधित विभागों से जानकारी जुटाई जा रही है। प्रभावितों, भर्ती मरीजों और इलाज से जुड़ा पूरा ब्योरा, वेरिफिकेशन के बाद अलग से पेश किया जाएगा।

कोर्ट में टैंकरों से वाटर सप्लाई के फोटो भी रखे

नगर निगम की ओर से कोर्ट में यह भी बताया गया कि मामला सामने आने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के जरिए स्वच्छ पेयजल की सप्लाई शुरू की गई। 30 दिसंबर को 36, 31 दिसंबर को 34 और 1 जनवरी को 33 टैंकरों से पानी भेजा गया। टैंकरों से पानी सप्लाई के फोटो भी निगम की ओर से पेश किए गए।

स्टेटस रिपोर्ट में कार्रवाई की जानकारी दी थी

स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया कि मामले में कार्रवाई की गई है। जोन-4 के जोनल अधिकारी और असिस्टेंट इंजीनियर को सस्पेंड किया गया है। वहीं, सब इंजीनियर की सर्विस खत्म की गई है। इसके बाद हाईकोर्ट ने शासन को डिटेल्ड रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे।

 

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